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गुरूर जनपद क्षेत्र में दम तोड़ रही है छत्तीसगढ़ सरकार की महत्वपूर्ण योजना 'नरवा-गरवा; घुरवा-बाड़ी'

बालोद। प्रदेश सरकार की महत्वपूर्ण योजना 'नरवा-गरवा; घुरवा-बाड़ी' योजना के तहत प्रदेश भर में छत्तीसगढ़ सरकार की ओर से तेजी के साथ प्रदेश भर में गौठानों का निर्माण किया जा रहा है, जिसमें प्रदेश सरकार ने बड़ी मात्रा में पैसे खर्च करने की बात कही जा रही है, यदि देर सवेर इस योजना का सीधा लाभ प्रदेश की जनता को नही मिली तो इस योजना पर पलिता लगना स्वभाविक है। योजना की सफलता हेतु सभी को एकजुट होकर प्रयास करनी चाहिए और खास तौर पर निर्माण करने और कराने वाले अधिकारियों की जिम्मेदारी और भी ज्यादा बढ़ जाती है; जिसकी कमी जिला के गुरूर जनपद क्षेत्र के गोठानो को देखकर आम जनता को लगने लगी है।


विदीत हो कि, गुरूर जनपद क्षेत्र के 78 पंचायतों में से ज्यादातर पंचायतों में गौठान का निर्माण किया जा रहा है; तो वहीं कुछ पंचायतों में गोठान निर्माण की प्रक्रिया पूर्ण की जा चुकी है, जिसमें ग्राम पंचायत खुन्दनी के गोठान भी शामिल है जहाँ पर गोठान निर्माण में भारी लापरवाही देखी गई है। आलम यह है कि गोठान सुखे के दिनो में किचड़ और दलदल से लबालब है तो वहीं निर्माण इंजीनियर के अनुसार बारिश के पानी के कारण दलदल और किचड़ भरी हुई है। ग्राम पंचायत खुन्दनी के आम नागरिकों के मुताबिक उनके गांव में महिनो से बारिश की एक बून्द भी नहीं गिरी है। दरअसल ग्राम पंचायत खुन्दनी के गोठान में पानी की पाइप लाइन फट चुकी है; जिसे महिनो से कोई देखने वाला तक नहीं है। चारवाहों ने ग्राम पंचायत के सरपंच व पंचायत के सदस्यो को इस बाबत जानकारी मुहैया कराई थी, जिसके बाद में सरपंच गणेश नेताम के द्वारा अनसुना कर दिया। आलम यह है कि; गोठान में जगह-जगह किचड़ और दलदल भरे पड़े हैं जिसके चलते मवेशियों को खासी परेशानियों का सामना करते हुए देखा जा रहा है।

ग्राम पंचायत खुन्दनी में सरकार के द्वारा बनाई गई गोठान में यदि शासन और प्रशासन ठीक से ध्यान देती; तो गोठान में कार्यरत महिलाओं की स्व सहायता समुह को भी लाभ मिल पाता ज्ञात हो कि, विगत बारिश के दिनो में बाढ़ आने के चलते महिला स्व सहायता समूह, खुन्दनी के महिलाओं के द्वारा बनाई गई वर्मी खाद; बाढ़ में बह गई जिसके चलते महिलाओं को भारी नुकसान उठाना पड़ा है तो वहीं गुरूर जनपद के एक अन्य और पंचायत से लगभग एक ट्रैक्टर वर्मी खाद की चोरी की बात भी सुत्रो के हवाले से कही जा रही है।

अमीत मांडवी
संवाददाता
 

इन सारी गतिविधियों को देखते हुए तो अब यही कहा जा रहा है कि जनपद पंचायत गुरूर के अधिकारी; सिर्फ इस योजना के निर्माण को लेकर ही अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं वह भी सरकारी मजबूरियों के चलते हकीकत के धरातल में अधिकतर अधिकारियों का आना और जाना ही नहीं होता है जिसके चलते सुखे के दिनो में गोठान किचड़ और दलदल से भरे पड़े हुए है।



 

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