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शास. उच्च. मा. विद्या. मरोदा टैंक भिलाई के प्राचार्य व जिला दुर्ग शिक्षा विभाग के लेखपाल का घिनौना खेल..

             प्राचार्य का कहना मेरे अधिकारी राजपूत को खुश करो नही तो काम भूल जाओ


घटना जिला दुर्ग छत्तीसगढ़ की है जहां प्राचार्य के द्वारा अनुकंपा नियुक्त महिला के साथ बत्तमीजी किया गया जब वह अपने काम मे पहले दिन पहुंची तो पहले ही दिन उसे स्कूल के कमरों की सफाई झाड़ू पोछा करवाया गया उक्त महिला बेवा है उसके पति शिक्षा विभाग मे क्लर्क (बाबू) के पद पर कार्यरत थे तबीयत खराब होने से उनकी मृत्यु हो गई जिनके जगह पर उनकी धर्मपत्नी को नौकरी मिली है वह भी शिक्षा विभाग के 10सो चक्कर लगाने के बाद चपरासी का पद दिया गया जहां प्राचार्य द्वारा ऐसे गंदी बाते सुनाई व बोली गई जो की उस महिला के लिए सुनना अशोभनीय था एक महिला दूसरे महिला के साथ ऐसा अभद्र व्यवहार भला कैसे कर सकता है एक महिला अगर विधवा हुई भी है तो उसमे महिला की गलती क्या है महिला के दो छोटे बच्चे भी है जो बहुत ही छोटे है जिनकी भविष्य की भी जवाबदारी महिला के ऊपर है क्यूंकी पिता का साया तो बच्चो के सर से उठ चुका है माँ ही उन दोनों का लालन पालन करेगी महिला पढ़ी लिखी है चाहे तो उसे शिक्षा अधिकारी उसके पति का जो पद था वह दे सकते थे क्यूंकी वह पद खाली था और है भी और कहा भी गया पद है भी तो वीआईपी लोगो के लिए है तुमको चपरासी का पद देंगे लेना हो तो पद लो नही तो मत लो ऐसा कहकर उस महिला को वहाँ से भगा दिया गया महिला को बच्चो का पालन पोषण करना है इसलिए उसने चपरासी पद के लिए हामी भर दी व शास.उच्च. मा.विद्या. मरोदा टैंक भिलाई मे चपरासी का काम करने का सोचा जहां वह पहले दिन स्कूल गयी वहाँ के प्राचार्य द्वारा झाड़ू पोछा करवाया गया साथ ही यह कहा गया शिक्षा विभाग के लेखपाल सत्येन्द्र सिंह राजपूत का बात हुआ है अभी तुमको नियुक्ति देने से मना किया गया है तुम पहले लेखपाल राजपूत जी को खुश करो वह  जैसा कहे जहां पर तुमको बुलाये वहाँ जाकर उनको खुश करो तभी तुमको काम करने दिया जाएगा इसके अलावा महिला के निजी मामले को लेकर जाति को लेकर प्राचार्य व राजपूत दोनों के द्वारा बहुत अधिक सुनाया गया साथ ही 5000 रुपए राजपूत द्वारा लिया गया और बाबू पद के लिए 5 लाख की माँग भी की गई थी महिला के बेवा होने के बाद इन जैसे अधिकारी लोगो के कारण ही महिलाए प्रताड़ित होती है |साथ ही महिला की जाति को लेकर कहना के मैं बंगाली हूँ प्राचार्य हूँ मुझे राज्यपाल से पदक प्राप्त हुआ है तुम तो गड़िया हो जात की तेली हो साहू को गड़िया लोगो के कारण ही छत्तीसगढ़ आगे बढ़ नही पा रहा है छत्तीसगढ़ को चलाने वाले हम जैसे बंगाली, राजपूत है हम अधिकारी है कुछ कर सकते है |  जांच करने पर पता चला की इस मामले को शिक्षा विभाग के कुछ अधिकारी दबाने पर लगे है अगर ऐसे अधिकारी पर कार्यवाही हो तो और भी अधिकारियों का खुलासा हो सकता है |      
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