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मुंगझर पंचायत के सरपंच पद उम्मीदवार ने वर्तमान सरपंच पर लगाया बड़ा आरोप..?


गरियाबंद। मुंगझर पंचायत के सरपंच पद के उम्मीदवार शंभु टांडिल्य ने बड़ा आरोप लगाया है। शंभु के मुताबिक संजू कश्यप महरा जाति से आती है। लेकिन उन्होंने शासन को धोखे में रखकर मेहरा जाति का उल्लेख करते हुए अनुसूचित जाति की सीट पर चुनाव लड़ लिया। शंभु ने बताया कि उन्होंने संजू कश्यप के दादा कन्हाईराम कश्यप का मिसेल(राजस्व रिकार्ड) भी शिकायत में संलग्न कर पेश किया है। वहीं उनके सरपंच पति निलाबंर कश्यप के परदादा का 1922 का मिसेल भी पेश किया है,जिसमें साफ उल्लेख हैं कि निलाबंर के परदादा सिंघी भी महरा जाति के है। शिकायतकर्ता ने बताया कि मिसेल एवं वंशावली में जब संजू कश्यप महरा जाति की है। तो किस आधार पर उन्हें मेहरा जाति का अंकसूची प्रदाय किया गया,यह भी जांच का विषय है। उन्होंने मामले में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से शिकायत कर न्याय की गुहार लगाते हुए जल्द ही उचित कदम उठाए जाने का आग्रह किया है।

एक ही समाज के व्यक्ति ने तीन आरक्षित सीटों पर लड़ा था चुनाव

मामले में जब पड़ताल किया तो पता चला कि संजू कश्यप अनुसूचित जाति से मुंगझर से सरपंच चुनाव लड़ीं,तो वहीं गाड़ाघाट के मोखागुड़ा से मालती बाई कश्यप पति गंगाराम कश्यप ने जनपद सदस्य क्रमांक-10 में अन्य पिछड़ा वर्ग में चुनाव लड़ा,इसी तरह पार्वती कश्यप ने गोहेकेला में सरपंच पद के लिए अनुसूचित जनजाति पद से चुनाव लड़ा। वहीं तीनों अलग-अलग आरक्षित सीटों से महरा जाति के लोगों ने चुनाव लड़कर शासन एवं निर्वाचन आयोग को धोखा देने का काम किया है,मामले में शंभु टांडिल्य ने इस विषय में भी चुनाव याचिका दायर कर निर्वाचन आयोग से फर्जी जाति से जीते उम्मीदवारों का निर्वाचन निरस्त कर पद शून्य घोषित किए जाने की मांग की है।

समाजिक सम्मेलन में भी सिर्फ महरा का ही उल्लेख

मामले में शिकायतकर्ता शंभु टांडिल्य ने राज्य निर्वाचन आयोग के साथ ही अनुसूचित जाति आयोग और उच्च स्तरीय जाति छानबीन समिति छत्तीसगढ़ शासन को भेजे गए शिकायत में भी जिक्र किया हैं कि महरा समाज के नियमावली पुस्तिका में भी सिर्फ महरा का ही उल्लेख है,जबकि वहां पर भी मेहरा शब्द का उल्लेख कहीं नहीं है। शंभु के मुताबिक सरपंच संजू कश्यप के पति निलाबंर कश्यप भी समाज के सदस्य है, ऐसे में जब मामले में सरपंच पति के परदादा के साथ ही संजू के दादा की वंशावली महरा ही है,तो आखिर अंकसूची एवं दाखिल खारिज में मेहरा शब्द का जिक्र किसने किया,इसे भी जांच के दायरे में लाकर जांच किए जाने की मांग शिकायतकर्ता शंभु टांडिल्य द्वारा की गई है।

माता-पिता से पूछना चाहिए सवाल

सरपंच संजू कश्यप ने उन पर लग रहे आरोपों पर खुलकर सफाई पेश किया है। उन्होंने कहा कि मैंने किसी प्रकार की जाति में फर्जी नहीं किया है,जो मेरी दाखिल खारिज रिकार्ड एवं अंकसूची में जाति उल्लेख है उसके आधार पर सरपंच के लिए नामांकन दाखिल किया है। उन्होंने कहा कि मेरी जाति के संबंध में जो आरोप लगाया जा रहा है इस संबंध में यहीं कहूंगी कि जब मैं छह वर्ष की थी,तब मेरा शाला में दाखिला हुआ और जाति को मेरे माता-पिता द्वारा लिखवाया गया था। कश्यप ने कहा कि स्वतंत्रता के बाद से हमारे वोटर लिस्ट में अनुसूचित जाति उल्लेखित है,हमारे वार्ड में सिर्फ मेरे परिवार के व्यक्ति ही निवास करते है,जिसमें अन्य जाति के व्यक्ति नहीं रहते,फिर आज तक क्यों यह वार्ड अनुसूचित जाति में ही आरक्षित होता आ रहा है। सरपंच ने कहा कि मैं पहली बार सरपंच अजा वर्ग में नहीं बनी हूं,अनेक बार मेरे जाति एवं परिवार के व्यक्ति सरपंच बन चुके है। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि जब सरपंच पद के लिए आवेदन जमा किया था,तो उस दौरान कुछ व्यक्ति द्वारा अगर दावा आपत्ति किया गया था,तो मेरा नामांकन उस दौरान क्यों निरस्त नहीं किया गया। वहीं सरपंच पंच के लिए जाति प्रमाण पत्र की आवश्यकता थी,तो मुझसे जाति प्रमाण पत्र क्यों नहीं मांगा गया। उन्होंने इस तरह के कार्रवाई को पक्षपात पूर्ण बताते हुए कहा कि जब सरपंच पद के लिए उनकी माता श्रीमती सुशीला कश्यप ने भी नामांकन दाखिला किया था,तो उनसे जाति के संबंध मंे जानकारी क्यों नहीं मांगा जा रहा है। सरपंच ने कहा कि उनके पिताजी स्वर्गीय भागीरथी कश्यप किस जाति में नौकरी किये,उनकी जाति का भी पता लगाया जाए। वहीं अगर माता-पिता द्वारा लिखवाए गए जाति को लेकर मुझे दोषी बताया जा रहा है,तो मेरे भाई विजय कश्यप की जाति की जांच की जाए।

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