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गोल्लु तस्कर के तीर से सरकार घायल

विनोद नेताम  
बालोद जिला में सरकारी संरक्षण प्राप्त लकड़ी ठेकादार गोल्लू उर्फ रोहित निर्लकर, निवासी - कोसागोंदी, तहसील - गुरूर, जिला : बालोद का रहने वाला है जो बड़े शातिर ढंग से पेड़ काटने में माहिर हैं। गोल्लु लकड़ी ठेकादार के नाम से गुरूर क्षेत्र के पेंड़ थरथर कांपते हैं और हो भी क्यों ना ? पेड़ से पत्तों के हिलने से पहले अपने धारदार मशीनों से पेंड काट डालता है। गोल्लु तस्कर काटे हुए लकड़ी को पूर्व सरकार के एक बड़े नेता से संबंधित व्यक्ति के आरामिल में कटी लकड़ी को बेंचता है। 

जानकार सुत्र बताते हैं गोल्लु लकड़ी तस्कर बड़ी निडरता से सरकारी जमीन पर कब्जा कर काटी गई लकड़ी को इक्कठ्ठा रखता है। वन विभाग से लेकर राजस्व विभाग व पुलिस विभाग के साथ मजबुत गठबंधन है और मजबुती इतनी भर से खत्म नहीं होती है। गोल्लू जब लकड़ी तस्करी करता है तो सरकार के केबिनेट मंत्री के साथ बालोद जिला के एसडीएम की गाड़ी भी रुक जाती है। गोल्लु लकड़ी तस्कर के लड़की संबंधित सुचना बालोद एस डी एम के साथ केबिनेट मंत्री अनिला भेड़िया को दी गई थी। एस डी एम सिल्ली थामस ने टीम भेजने की बात कही तो कई पत्रकार वही घंटों इंतजार करते रहे और गोल्लु पत्रकारों के सामने बैठकर डिंग्गे हांक रहा था। 


इन दिनों प्रदेश में लगातार खराब मौसम की दौर चल रही है बारिश और ओलो ने किसान-मजदूर के साथ सरकार की भी चिंता बढ़ा दी है। पिछले दिनों छत्तीसगढ़ राज्य के वन मंत्री, आगामी आने वाले साल में गहन मात्रा में पौधे रोपने की योजना की बात कह चुके हैं। अब जिला प्रशासन और सरकार के केबिनेट मंत्री के इसी प्रकार से निष्क्रियता आगे बनी रही तो वनमंत्री जी को योजना  धरातल पर उतारने की तैयारी को रोककर गोल्लु ऊर्फ रोहित निर्मलकर जैसे लकड़ी ठेकेदार के ऊपर कारवाही करनी चाहिए और बालोद एसडीएम से भी पूछा जाना चाहिए कि कुदरत के नुक़सान से किसको फायदा और नुकसान किसको। साथ ही यह सवाल अनिला भेड़िया केबिनेट मंत्री महिला बाल विकास व समाज कल्याण विभाग छत्तीसगढ़ शासन से पूछा जाना चाहिए कि समाज को बैगर पेंड़ पौधे के देखना उचित होगा क्या। धन्य है वो लोग जो जल जंगल जमीन के बात को कहते हुए मरना पसंद करते हैं नाम तो सभी ने सुना होगा शहीद स्व: वीर नारायण सिंह।


पूरा बालोद जिला लकड़ी तस्करी के चलते बंजर होने के दिशा में अग्रसर है जिला के बड़े-बड़े आरामिल कच्ची और इमारती लकड़ी के भंडार से लबालब भरे रहते हैं, पिछले दिनों डौंडीलोहारा क्षेत्र के कमकापार के चिरान में जप्त की गई सागौन की लकड़ी उदाहरण है। खैर गोल्लु तो दिन भर पेंड़ काटकर रात को घर्राटे मार कर सोता है। पिछले दिनों गुरूर जनपद के जनपद सदस्य द्वारा संचालित आरामिल में भी बड़ी मात्रा में अर्जुन (कहवा) कड़ी बबुल के साथ अन्य लकड़ी देखी गई थी। आरामिलो में लकड़ी पहचाने में लकड़ी ठेकेदारों का महत्वपुर्ण हाथ है। कोसागोंदी और पड़कीभाट के पास एकत्र रखी लकड़ी को गोल्लु ने किसी के चिता के लिए नही रखा है जो धारदार मशीनों से कटने के बाद सुसज्जित रुप से सरकारी जमीन पर पड़ा है। देखकर मौत के इच्छुक व्यक्ति भी लालायित हो सकते हैं मरने के लिए शायद बालोद एस डी एम के द्वारा भेजी जाने वाली टीम भी इसी तरह के लालच का शिकार होना पड़ा होगा इस प्रकार से अंदाजा लगाया जा सकता है, जिसके चलते वहा पर पत्रकारों को घंटों मोबाइल पर घंटी बजाना पड़ा; एक सवाल मन में रह जाता है कि पेंड़ तो गोल्लु ने काट दिया तो बैगर पेंड़ डाल कैसे और बैगर डाल चिड़िया के घोंसला कैसा और बैगर घोंसला के चिड़िया कैसा।


प्रधानमंत्री आवास से विहीन गरीब जैसा चिड़िया की हालत हो सकती है फिर प्रर्यावरण की सुरक्षा को लेकर देश के सुप्रीम कोर्ट से लेकर अनेक सरकारों ने सैकड़ों नियम बनाये है जिसका पालन करने और करावाने वाले अधिकारियों के कंधों में सुस्ती के गांठ है शायद, जिसके चलते कुदरत के द्वारा लगातार हो रहे प्रकोप तक को देखने के बाद सोसल डिस्टेंस की सुस्ती के गांठ वाले लोग जबरदस्त पालन कर रहे हैं। को = कोई -रो =रोड़ पर  -ना -नही निकले =कोई रोड़ पर नहीं निकले  भले गोल्लु मशीन से लकड़ी कांटते रहे और आसमान बरसते रहे और चिड़िया कहती रहे टुटा टुटा एक परिंदा ऐसा टुटा ......लुटा लुटा गोल्लु ने की घोंसला फिर बन ना पाया।
नगर पंचायत मगरलोड में चला बेंच टेबल खरीदी में घोटाला।