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रेत की काली कमाई...

बालोद। जिला मुख्यालय से महज कुछ दूरी पर स्थित ग्राम अरौद में विभाग ने 10 घन मीटर की 5 रॉयल्टी बुक एवम 3 घन मीटर की 3 रॉयल्टी बुक जारी की है। रॉयल्टी में 10 घन मीटर में 1217 रुपये और 3 घन मीटर में 365 रुपये 36 पैसे शुल्क रेत परिवहन करने वाले वाहनों को देना होता है। लेकिन शिकायत में 10 घन मीटर का 5000 रुपया से अधिक और 3 घन मीटर का 2500 रुपया की यानी तय कीमत से चार गुणा वसूली रोज की जा रही हैं।


घाट में रोजना 200 से अधिक हाइवा गाड़ी लग रही है। जिला में रेत खनन की सुर्खियां हर अखबार की मुख्य हेडलाइन रहती है खबरें लगती रहती है और रेत हाईवा में पार होती है। रेत का स्वभाव होता है रात में अधिक ठंड होना और दिन में गर्म। जिला प्रशासन के कारवाही से वाकीफ रेतेली कमाई करने वाले लोग इतने ताकतवर है कि देश के सर्वोच्च न्यायालय के आदेश तक को दरकिनार कर देते हैं। कहते हैं कि रेत का रंग सुनहरा होता है जिसके चलते सुदर्शन नायक जैसे कलाकार कलाकृति बनाते हैं लेकिन बालोद जिले में रेत का रंग लाल है और इसे लाल बनाने वाले लोग कौन कौन है सभी जानते हैं।

विनोद नेताम स्थानीय संवाददाता 
सालो से जिला प्रशासन के नाक के नीचे से इस तरह की वाकिया कर सरकारी खजाने को नुक़सान पहुंचाया जा राहा है सरकार से लेकर सभी एजेंसियों को लगभग पता है लेकिन नियम से खनिज निकाल सके इसकी उम्मीद कम ही है । जिला के रेत खदानों में मार-पिटाई से लेकर जानलेवा हमला जैसे घटना चुकी है, लेकिन इसके बाद भी रेत की अवैध निकासी रोकी नहीं जा सकी हैं जानकारों का मानना है की रसूखदारों के रसुख के आगे सबकी बोलती बंद हो जाती है जिसके कारण यह घटनाक्रम निरंतर जारी है।

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