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सुनील कुमार गंगबेर को आत्महत्या के लिए उकसाने वाले लोगों के नामों लोगों की अटकलें बढ़ी।

बालोद। गुरूर थाना क्षेत्र में बीते दिनों गुरूर के अपने निवास में फांसी लगाकर आत्महत्या करने के बाद उसे सट्टा के दांव में लगे पैसा को लेकर दबाव बनाने वाले थाना क्षेत्र के लोग कई नामों पर अटकले लगाना शुरू कर दिए हैं जिनमें से कई नाम सत्ताधारी पार्टी के नेताओं के नाम तक शामिल है। बीते दिनों सुनील कुमार गंगबेर की आत्महत्या के बाद से गुरूर व बालोद पुलिस मामले की जड़ तक जाने के लिए सुनील कुमार गंगबेर की काल डिटेल निकाल कर जांच करने की बात पहले ही कह चुकी है। 

विदित हो की बालीवुड अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत के आत्महत्या के मामले में मुंबई और महाराष्ट्र पुलिस जिस तत्परता से जांच पड़ताल कर रही है लोग उसी तरह के जांच की उम्मीद लोग गुरूर पुलिस से भी कर रही है। वहीं गुरूर थाना क्षेत्र के कुछ तथाकथित कांग्रेसी नेताओं के सुर भी मामले को लेकर बिगड़े नजर आ रही है और बिगड़े भी क्यो ना लाख जतन के बाद चांऊर वाले बाबा के सिंहासन पर विराजमान होने की मौका जो आया है। जिसके सट्टा जैसी समाजिक और आर्थिक अपराध के चलते यदि विपक्ष और खुद के पार्टी के लोग सरकार से सवाल करे तो समझो गड़बड़झाला है और इस गड़बड़झाला की सत्यता को ढंकने की कवायदें कुछ लोगों ने शुरू कर दी है। 


कुर्सी की ताकत व पद को अपराध के प्रति समर्थन ना सिर्फ उस जिम्मेदारी का अपमान है जिसके चलते प्रदेश जनता जनप्रतिनिधियों को अपने सर पर बिठाते हैं, साथ ही अपने आपके लिए भी यह चिंतन का विषय है। इतनी बड़ी घटना, क्षेत्र में घट जाने के बाद भी गुरूर थाना क्षेत्र व कवंर चौकी के अंतर्गत ग्रामीण अंचलों में खुलेआम सट्टा का अवैध कारोबार दिनदहाड़े जारी है। लोगों की मानें तो पुलिस को अवैध सट्टा संचालित करने के शिकायत करने के बाद भी पुलिस उल्टा शिकायतकर्ता को खरी-खोटी सुनाने की बात कही जाती है। कवंर के पूर्व सरपंच टुकेश्वर पांडे ने कवंर चौकी अंतर्गत कवंर ग्राम में अवैध सट्टा संचालित करने की शिकायत अपने कार्यकाल के दौरान किया था, लेकिन उस वक्त के कवंर चौकी प्रभारी रहे एस आई खान ने अवैध सट्टा संचालित करने की खबरों को सिरे से नाकर दिया और कार्यवाही नहीं किया। आज उसी के परिणाम स्वरूप कवंर, पलारी, अरमरीकला, अरकार, पुरूर, बोडरा से लेकर गुरूर विकासखंड क्षेत्र में खुलेआम सट्टा-पट्टी लिखा जाता है।  साथ ही साथ इन जगहों पर खुलेआम छोटे-छोटे बच्चों के द्वारा चिलम की धुंआ बमलहरी बोलकर खुले आसमान छोड़ कर गढ़ी हुई छत्तीसगढ़ की मिशाल स्पष्ट रूप से देखा सकता है। 

विदीत हो कि; प्रदेश के गृहमंत्री ताम्रध्वज साहू के लिए यह क्षेत्र उनके गृह क्षेत्र जैसा ही है जहाँ पर उनके परिवार के अन्य सदस्य आज भी निवास करते हैं और बरसों की बिसाई राजनीतिक बिसात पर आज भी राजनीति की बागडोर परिवार के सदस्य सम्हाल रहे हैं जिसके बाद भी आलम यह है कि क्षेत्र के जनता अवैध सट्टा और गांजा की लतो के वजह से अपने घरों में आए दिन गृह कलेश से परेशान हैं। वहीं क्षेत्र के जनता इन अवैध कारोबार और अवैध कारोबारियों से उब गई है और पुलिस प्रशासन के ऊपर से विश्वास में कमी देखने को मिला है जिसका प्रत्यक्ष प्रमाण ग्राम पंचायत अरमरीकला में देखने को मिलता है, जहाँ पर अवैध शराब पीने से लेकर बेचने वालो पर भारी भरकम जुर्माना की घोषणा कर अरमरीकला से अवैध शराब की जड़ को खत्म कर दिया है। लोग कहते हैं कि कानून (पुलिस) हाथ बहुत लंबा होता है जो समाज के अपराध को अपने लंबे हाथों में जकड़ कर कम करता है, लेकिन जब अपराध निरंतर बढ़े तो उसके बढ़ने का अंदाजा बड़े ही आसानी से लगाया जा सकता है बहरहाल बालोद पुलिस आगे आने वाले दिनों में अवैध कारोबार के सौदागरों से दो दो हाथ करेगी या फिर अवैध कारोबार निरंतर जारी रहेगी अब यह देखने के बाद ही पता चल पायेगा।

 विनोद नेताम पत्रकार 
वैसे आपके जानकारी के लिए बताते है कि गृहमंत्री ताम्रध्वज साहू ने गुरूर थाना क्षेत्र में ही अपने बचपन के कई साल गुजारे हैं और अर्जुन हिरवानी जिस साहू समाज के प्रदेश अध्यक्ष है, गृहमंत्री उसी समाज से आते हैं साथ ही सुनिल कुमार गंगबेर भी साहू समाज से आते हैं लेकिन समाजिक और आर्थिक अपराध की जड़ इस क्षेत्र में काफी दिनों से फल और फुल रहा है साथ ही गुरूर पुलिस के द्वारा समय-समय में कार्यवाही की जाती रही है लेकिन सट्टे के बड़ा खाईवाल अब तक पुलिस के पकड़ से बाहर है और यूपी के विकास दूबे बनने की तैयारीयों में लगा है।
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